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पृष्ठभूमि

1. उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा नामक आठ राज्य शामिल हैं । इन राज्यों के विकास का संबंधम उनकी अपनी-अपनी पंचवर्षीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं और केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्रीय अभिकरणों से संबंध रखता है । इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में अंतर्राज्यीय स्वरूप की परियोजनाएं उत्तर पूर्वी परिषद के माध्यम से वित्तपोषित की जाती हैं जिसके पास इस उद्देश्य के लिए पृथक अतिरिक्त बजट है ।

 

2. उत्तर पूर्व विकास कार्यों के लिए अनिवार्य रूप से केंद्रीय वित्तपोषण पर निर्भर करता है । उत्तर पूर्वी क्षेत्र के सभी राज्य विशेष श्रेणी राज्य हैं जिनकी विकास योजनाएं 90% सहायता अनुदान और 10% ऋण के आधार पर केंद्रीय वित्तपोषित होती हैं । इसके अतिरिक्त विशेष ऋणी राज्यों को गैर योजना व्यय के लिए केंद्रीय सहायता के 20% उपयोग की भी अनुमति है ।

 

3. इस तथ्य के बावजूद कि उत्तर पूर्वी राज्यों का प्रति व्यक्ति योजना परिव्यय काफी लंबे समय से राष्ट्रीय औसत से पर्याप्त उच्चतर बना हुआ है, ये राज्य अवसरंचना विकास के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं । प्रति व्यक्ति राज्य घरेलू उत्पाद अथवा अन्य विकास जैसे विद्युत सड़कों की लंबाई अथवा अस्पताल बिस्तरों के मामले में उत्तर पूर्व राष्ट्रीय औसत से पीछे है । हालांकि साक्षरता स्तर राष्ट्रीय औसत से उच्चतर है तथापि, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उद्यमयिता दक्षता कमजोर बनी हुई है ।

 

4. चूंकि इस क्षेत्र को आर्थिक विकास के लाभ अभी तेजी से प्राप्त करने हैं इन विभिन्न सहायक उपायों के माध्यम से हाल ही में इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए हैं । अक्तूबर, 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उत्तर पूर्वी क्षेत्रों के लिए नई पहलों की घोषणा की और यह निर्धारण किया कि उत्तर पूर्वी राज्यों के विकास के लिए केंद्रीय मंत्रालय/विभाग अपने बजट का कम से कम 10% नियत करेंगे । योजना आयोग द्वारा विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के परामर्श से की गई प्रारंभिक कार्रवाई से यह पता चलता है कि कुछ केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा वर्ष 1997-98 के दौरान उत्तर पूर्व के लिए व्यय उस वर्ष के लिए जीबीएस द्वारा निर्धारित 10% से कम रहा । तत्पश्चात योजना आयोग ने उत्तर पूर्व में विकास परियोजनाओं हेतु अवसंरचना में सहायता के लिए जीबीएस द्वारा निर्धारित 10% की अव्ययित राशि में से उत्तर पूर्व के लिए संसाधनों के केंद्रीय पूल के सृजन की संभावनाओं का पता लगाया ।

 

5. योजना आयोग द्वारा संसाधनों के ऐसे केंद्रीय पूल के गठन के लिए मंत्रिमंडल को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था । मंत्रिमंडल ने 15 दिसंबर, 1997 को इस दृष्टिकोण का सिद्धांतः अनुमोदन कर दिया और यह प्रेक्षण किया कि केंद्रीय संसाधन पूल के सृजन को संसद के अनुमोदन की आवश्यकता होगी और इसके लिए 12वीं लोकसभा के गठन तक प्रतीक्षा करनी होगी । इसलिए वर्ष 1997-98 में केंद्रीय पूल का गठन नहीं किया जा सका ।

 

6. वर्ष 1998 में लोकसभा चुनावों के पश्चात केंद्रीय संसाधन पूल के सृजन संबंधी मामले को वित्त मंत्रालय के परामर्श से आगे बढ़ाया गया प्रधानमंत्री द्वारा 8 मई, 1998 को उत्तर पूर्वी राज्यों के मुख्य मंत्रियों की एक बैठक बुलाई गई जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ यह भी तय किया गया कि इन राज्यों में विशेष परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए संसाधनों के अव्ययपगत केंद्रीय संसाधन पूल बनाया जाएगा । प्रधानमंत्री के भाषण के संबंधित पैराग्राफ को निम्नवत् पढ़ा जाएः

 

"हम केंद्रीय संसाधन पूल के सृजन की व्यवहार्यता की जांच पड़ताल कर रहे हैं जिससे इस समग्र क्षेत्र में परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन हेतु अतिरिक्त निर्णायक अतिरिक्त सहायता मिलेगी । संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के बजट के 10% आबंटित व्यय के अव्ययित शेष सृजित यह पूल 1500 करोड़ रु. वार्षिक पर्याप्त राशि का होगा ।"

 

7. सरकार की यह वचनबद्धता वर्ष 1998-99 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री के भाषण में भी परिलक्षित होता है । बजट भाषण का संबंधित पैराग्राफ नीचे दिया गया है :

 

"इसके अतिरिक्त यह निर्णय लिया गया है कि अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल का सृजन सभी मंत्रालयों से निधियां जमा करके किया जाएगा जहां उत्तर पूर्वी क्षेत्र संबंधी योजना व्यय उस मंत्रालय के कुल योजना आबंटन के 10% से कम होगा । उत्तर पूर्वी क्षेत्र हेतु आबंटन के 10% और किए गए वास्तविक व्यय के बीच अंतर को केंद्रीय पूल में अंतरित कर दिया जाएगा जिसका उपयोग उत्तर पूर्वी राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु विशेष कार्यक्रमों के वित्तपोषण के उपयोग हेतु किया जाएगा ।"

 

8. इसके अतिरिक्त1998-99 के बजट प्रस्तावों के भाग के रूप में यह घोषणा की गई थी कि " यह निर्णय लिया गया है कि सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों को उत्तर पूर्वी क्षेत्र में विशिष्ट विकास कार्यक्रमों के लिए अपने बजट का न्यूनतम 10% निर्धारित करना चाहिए । किसी भी मंत्रालय/विभाग द्वारा इस प्रावधान के उपयोग में कमी (कुछ छूट प्राप्त मंत्रालयों/विभागों को छोड़कर) कमी की राशि को इस मानक के अनुसार उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास हेतु केंद्रीय संसाधन पूल शीर्षक से लोकलेखा से नए रिजर्व फंड में अंतरित कर दिया जाएगा । इस समय प्रतीकात्मक प्रावधान मे रूप में इस निधि में 1 करोड़ रु. अंतरित किए जा रहे हैं । 1997-98 में यह छोटे से प्रावधान आकलन 1600 करोड़ रु. किया गया । उत्तर पूर्वी क्षेत्र की विशिष्ट केंद्रीय योजना के प्रावधानों के विश्लेषण हेतु ऐसी ही कार्रवाई वर्ष 1998-99 के बजट में भी की जाएगी और संसाधन पूल में धनराशि 10% के मानक में कमी की सीमा तक संशोधित अनुमानों के स्तर पर बढ़ाई जाएगी ।

 

9. वर्ष 1998-99 का बजट संसद द्वारा पारित कर दिया गया जिसके साथ अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल संसद के अनुमोदन से गठित किया गया ।

 

उद्देश्य:

 

10. उत्तर पूर्वी राज्यों एवं सिक्किम के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों का एक सम्मेलन जनवरी, 2000 में आयोजित किया गया जिसमं् प्रधानमंत्री ने अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला । प्रधानमंत्री के भाषण का संबंधित पैराग्राफ इस प्रकार है :

 

"मेरी सरकार ने उत्तर पूर्व और सिक्किम के लिए अव्यपगत निधियों का एक पूल भी सृजित किया है इस पूल का उद्देश्य इन राज्यों में विकास परियोजनाओं का वित्त पोषण है जो नई अवसंरचना सृजन में संसाधनों की कमी को पूरा करेगा जोकि केंद्रीय सरकार की उच्च प्राथमिकता क्षेत्र है ।;"

 

11. अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल स्कीम का व्यापक उद्देश्य उत्तर पूर्वी क्षेत्र में परियोजनाओं/स्कीमों के लिए नई अवसंरचना हेतु बजटीय वित्त पोषण का प्रवाह बढ़ाकर इस क्षेत्र में अवसंरचना का त्वरित विकास सुनिश्चित करना है । भौतिक एवं सामाजिक अवसंरचना जैसे सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, विद्युत, सड़कें एवं पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, जलापूर्ति एवं सफाई दोनों क्षेत्रों पर प्राथमिकता वाले भौतिक अवसंरचना क्षेत्र में परियोजनाओं सहित केंद्रीय पूल के अंतर्गत सहायता प्रदान करने हेतु विचार किया जाता है ।

 

12. केंद्रीय पूल से निधियां इस राज्य क्षेत्र और केंद्रीय की परियोजनाओं/स्कीमों के लिए जारी की जा सकती हैं । बहरहाल, केंद्रीय पूल में उपलब्ध निधियों से आशय सामान्य योजना कार्यक्रमों को संपूरित करना नहीं है चाहे वह राज्य सरकारों की हों अथवा केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/अभिकरणों की हों ।

 

एनएलसीपीआर निधियों के प्रचालन हेतु संस्थागत व्यवस्था

 

13. वर्ष के दौरान अव्यपगत केंद्रीय पूल के प्रचालन हेतु संस्थागत प्रबंधों को व्यवस्थित किया गया है । इस पूल के प्रचालन हेतु दिशानिर्देशों को संशोधित किया गया है । अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल के प्रचालन हेतु समिति पुनर्गठित की गई है । पुनर्गठित समिति के अध्यक्ष सचिव, डोनर हैं और इसमें वित्त मंत्रालय और योजना आयोग का प्रतिनिधित्व है । डोनर मंत्रालय के वित्तीय सलाहकार को इस समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है ।एनएलसीपीआर के अंतर्गत वित्तपोषण हेतु उनके प्रस्तावों पर विचार करने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों को भी संबंधित बैठक में आमंत्रित किया जाता है ।

 

14. अव्यपगत केंद्रीय संसाधन पूल के अंतर्गत परियोजनाएं अभिज्ञात करने के लिए राज्यों से प्रत्येक परियोजना के संक्षिप्त विवरण के साथ परियोजनाओं की प्राथमिकता सूची वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने से पूर्व प्रस्तुत करने को कहा गया है । पूरे वर्ष परियोजनाएं प्राप्त करने की पूर्व पद्धति विभिन्न संबंधित राज्य विभागों द्वारा बंद कर दी गई है । अब योजना आयोग और संबंधित राज्य का विकास विभाग एनएलसीपीआर के लिए नोडल विभाग है और व्यय विभाग डोनर है जो राज्य के अन्य सभी विभागों से संपर्क रखता है । प्राथमिकता सूची में राज्य द्वारा परियोजनाओं को दी गई प्राथमिकता केवल सुझावात्मक है और विस्तृत जांच के लिए परियोजनाओं का पता लगाने और अंततः उन्हें बनाए रखने हेतु परियोजनाओं की जांच समीक्षा समिति द्वारा की जाती है । प्राथमिकता की जांच में समिति अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखती है :

 

  • आर्थिक अवसंरचना वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता ।
  • सामाजिक क्षेत्र में पेय जलापूर्ति और अन्य स्वास्थ्य एवं सफाई परियोजनाओं को प्राथमिकता ।
  • स्वायत्त जिला परिषद में परियोजनाओं को प्राथमिकता (संविधान की छठी अनुसूची) ।
  • क्षेत्र विशेष में जिससे परियोजना संबंधित है, परियोजना क्रियान्वयन में किसी राज्य के विगत निष्पादन पर भी विचार किया जाएगा ।
  • विगत वर्षों में राज्य विशेष द्वारा निधियों के समग्र उपयोग एवं समायोजन भी वर्ष में उस राज्य के लिए शुरू किए जाने वाली परियोनाओं की संख्या को मार्गदर्शित करेगा ।

15. ऐसी बनाई रखी गई परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट संबंधित राज्य द्वारा तैयार की जाती है तत्पश्चात इन परियोजना प्रस्तावों की संबंधित केंद्रीय मंत्रालय/विभाग के परामर्श से जांच की जाती है । इस प्रकार प्राप्त सिफारिशें/विचार अव्यपगत केंद्रीय पूल के प्रचालन हेतु समिति के सम्मुख प्रस्तुत की जाती हैं जो इन प्रस्तावों पर विचार करती है और अनुमोदन प्रदान करती है ।

 

16. समिति के अनुमोदन के पश्चात निधियां डोनर मंत्रालय द्वारा क्रियान्वयन अनुसूची प्रस्तुत करने पर स्वीकृत और जारी की जाती हैं । तदनंतर निर्मुक्तियां केवल पूर्व निर्मुक्तियों के उपयोग प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर कर दी जाती हैं ।

गतिविधियां

क्षमतानिर्माण और तकनीकी सहायता

वित्त मंत्रालय का एनई पैकेज-एसआईडीएफ

एनईआर विजन 2020

एनई राज्यों के लिए प्रधानमंत्री पैकेज

विकास सेमिनार