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बंग्लादेश

पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ संपर्क और व्यापार के संवर्द्धन के लिए


बंग्लादेश और भारत के परियोजनाओं के साथ द्विपक्षीय परियोजनाएं

 

(जून, 2012 की स्थिति में । ये परियोजनाएं वैचारिक स्तर से लेकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी तक के विभिन्न चरणों में हैं। )

 

बंग्लादेश

  1. आशुगंज, बंग्लादेश में अंतर्देशीय कंटेनर पत्तन – जनवरी 2010 में बंग्लादेशी प्रधानमंत्री के भारत दौरे के दौरान भारत और बंग्लादेश के बीच भारत-बंग्लादेश अंतर्देशीय पारगमन और व्यापार प्रोटोकॉल में आशुगंज को पोर्ट ऑफ कॉल के रूप में शामिल करने पर द्विपक्षीय समझौता हुआ था । इस प्रोटोकॉल के तहत एक देश का अंतर्देशीय जलयान दूसरे देश में विनिर्दिष्ट मार्गों के जरिए पारगमन कर सकता है ।
    विदेश मंत्रालय और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण आशुगंज पत्तन के विकास के संबंध में व्यवहार्यता अध्ययन करने के लिए विचारार्थ विषय तैयार कर रहे हैं । इस व्यवहार्यता अध्ययन पर आने वाला खर्च बंग्लादेश निधि को सहायता के तहत विदेश मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा ।
  2. बंग्लादेश में आशुगंज-अखौरा मार्ग का चौड़ीकरण (यह त्रिपुरा से जुड़ेगा) – डीपीआर तैयार किया जा रहा है । क्रियान्वयन एजेंसी-एमईए और एनएचएआई ।
  3. अखौरा-अगरतला रेल लिंक – परियोजना से जुड़े मसौदा समझौता ज्ञापन पर बंग्लादेश के साथ विचार-विमर्श चल रहा है । विस्तृत इंजीनियरी रिपोर्ट को रेल मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है । परियोजना क्रियान्वयन को रेल मंत्रालय द्वारा समन्वित किया जाएगा । बंग्लादेश की तरफ परियोजना पर आने वाली लागत का निधीयन विदेश मंत्रालय द्वारा और भारत की तरफ आने वाली लागत का वहन डोनर मंत्रालय द्वारा किया जाएगा ।
  4. आईडब्ल्यूटीटी प्रोटाकॉल में अतिरिक्त मार्गों का समावेश – आईडब्ल्यूएआई के पास आईडब्ल्यूटीटी प्रोटोकॉल में अतिरिक्त खंडों (राजशाही से अरिचा तक और तिस्ता-मेघना के संगम से अखौरा तक) को समाविष्ट करने का प्रस्ताव है । विदेश मंत्रालय आईडब्ल्यूएआई और जल संसाधन मंत्रालय के साथ परामर्श से इन मार्गों के आईडब्ल्यूटीटी प्रोटोकॉल में शामिल किए जाने के महत्वों की जांच करेगा ।
  5. फेनी नदी पर पुल (सबरूम, त्रिपुरा में) - जनवरी, 2010 के भारत-बंग्लादेश संयुक्त विज्ञप्ति में यह निर्णय लिया गया था कि त्रिपुरा में भारत-बंग्लादेश सीमा पर सबरूम-रामगढ़ एलसीएस विकसित किया जाए । सबरूम मौजूदा एलसीएस है । दो एलसीएस को चालू करने के लिए खेनी नदी पर एक पुल बनाया जाना है जो भारत और बंग्लादेश के बीच सीमा का काम करेगा । त्रिपुरा सरकार वाणिज्य विभाग, भारत सरकार की असाइड (एएसआईडीई) स्कीम से सहायता लेकर इस पुल के लिए निधीयन करेगी ।
  6. चेकपोस्ट को एकीकृत करने के लिए सुतरकंडी एलसीएस में अवसंरचना का उन्नयन (असम) – असम सरकार ने अवसंरचनात्क कार्य के लिए 7 एकड़ क्षेत्र की पहचान की है । गृह मंत्रालय की टीम के दौरे की आशा है।
  7. मेघालय सीमा पर बालात और कलाईचर में सीमा हाट -वर्तमान में चालू है।
  8. सीमा प्रबंधन विभाग, भारत सरकार द्वारा दउकी (दउकी-तमाबिल) मेघालय में एकीकृत चेकपोस्ट की स्थापना ।
  9. वाणिज्य विभाग की असाइड स्कीम से निधीयन से मेघालय सरकार द्वारा दालु, बोरसोरा, घासुपारा में भू-सीमा शुल्क केंद्रों का अवसंरचना उन्नयन ।
  10. कावरपुचिआह/ धेमागिरि में आईसीपी-थेगामुख एलसीएस, मिजोरम ।
  11. भारतीय कार्गो के लिए बंग्लादेश में चटगांव और मोंगला पत्तनों का इस्तेमाल- मसौदा तौर-तरीके पर द्विपक्षीय चर्चा चल रही है।
  12. अखौरा (त्रिपुरा के नजदीक), त्रिपुरा में एकीकृत चेकपोस्ट का विकास – अखौरा में आईसीपी परियोजना लागत 73.50 करोड़ रु. जिसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है । लगभग 8.49 एकड़ जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है । भू-स्वामियों को 1,55,36,200 रु. की राशि क्षतिपूर्ति के तौर पर पहले ही अदा की जा चुकी है । 17 मई, 2011 को माननीय गृह मंत्री ने इसका शिलान्यास किया । डीपीआर अनुमोदित हो चुका है । अखौरा में आईसीपी के लिए विस्तृत इंजीनियरी रिपोर्ट पर ईएससी ने 25 जून, 2010 को आयोजित अपनी बैठक में विचार किया था । यह निर्णय लिया गया था कि इसे उप-समिति को भेज दिया जाए जो रिपोर्ट की जांच करेगा और इस निर्णय के लिए सचिव (बीएम) को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा कि इस आईसीपी के लिए निविदा आमंत्रण नोटिस जारी किया जाए अथवा नहीं । उप-समिति की बैठक 6 जुलाई, 2010 को संपन्न हुई और इसने अपनी रिपोर्ट सौंपी । ईएससी ने इस रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया और उप-समिति ने अपनी 6.8.2010 की बैठक में डीईआर की सिफारिश की । डीईआर के अनुसार भूमि लागत को छोड़कर 73.50 करोड़ रु. परियोजना लागत अनुमोदित की गई है । निविदा आमंत्रण नोटिस 19 अगस्त, 2010 को जारी कर दिया गया और इसे 30 सितंबर, 2010 को खोला गया । नीलामी का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन ईएससी द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है । ठेकेदार को कार्य सौंप दिया गया है। त्रिपुरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार इस मामले में पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी नहीं है ।
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सुश्री मर्सी Epao, उप सचिव

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