Print

एकीकृत चेकपोस्ट

सीमा प्रबंधन विभाग

 

(गृह मंत्रालय)

 

द्वारा

 

भू-सीमा पर एकीकृत चेकपोस्ट (आईसीपी)

 

 

एनईआर में आईसीपी स्थापित किए जा रहे हैं ।

  1. चरण-I: अखौरा (त्रिपुरा), मोरे (मणिपुर), दउकी (मेघालय)
  2. चरण-II: सुतरखंडी (असम), कावरपुचिआह (मिजोरम)

आईसीपी का औचित्य

 

1. सीमा प्रबंधन के मुख्य उद्दश्यों में से एक उचित व्यापार और वाणिज्य को सुकर बनाने में देश को विघटनकारी ताकतों के विरुद्ध देश की सीमाओं को सुरक्षित करना और ऐसे तत्वों को नाकाम करने वाले तंत्रों को स्थापित करना है । इस परिप्रेक्ष्य में और बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए संपूर्ण रणनीति के हिस्से के तौर पर यह आवश्यक है कि अपनी भू-सीमाओं पर स्थित प्रवेश द्वारों पर अवसंरचना का एकीकृत विकास किया जाए ।

 

2. हमारी भू-सीमा में स्थित इन प्रवेश स्थलों पर कार्यरत सीमा शुल्क, प्रवासन और अन्य विनियामक एजेंसियों के पास मौजूद वर्तमान अवसंरचना सामान्यतया अपर्याप्त है । गोदाम, पार्किंग स्थल, बैंक, होटल आदि जैसी समर्थन सुविधाएं या अपर्याप्त या फिर नदारद हैं । सभी विनियामक समर्थन सामान्यतया अपर्याप्त हैं और एक कॉम्प्लेक्स में मौजूद नहीं हैं । इन सुविधओं के नजदीक में मौजूद होने पर भी विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों/सेवा प्रदाताओं के एकीकृत कार्यकलापों के लिए कोई एक एजेंसी उत्तरदायी नहीं है ।

 

3. सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा इस स्थिति को हल करने की आवश्यकता को महसूस की गई । उनमें से एक उपाय जिस पर सहमति हुई है वह यह है कि हमारी भू-सीमाओं पर स्थित प्रमुख प्रवेश स्थलों पर एकीकृत चेकपोस्ट (आईसीपी) बनाए जाएं । ये एकीकृत चेकपोस्ट प्रवासन, सीमी शुल्क, सीमा सुरक्षा आदि जैसी सभी विनियामक एजेंसियों को पार्किंग, गोदाम, बैंकिंग, होटल आदि जैसी समर्थन सुविधाएं एक साथ सभी आधुनिक सुविधायुक्त एक ही कॉम्प्लेक्स में मुहैया कराएंगे ।

 

आईसीपी के स्कीम

 

4. तद्नुसार 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत एक योजना के रूप में भारत-पाकिस्तान, भारत-नेपाल, भारत-बंग्लादेश और भारत-म्यांमार सीमाओं पर 13 स्थलों पर आईसीपी स्थापित करने के लिए सुरक्षा पर सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया था । भारतीय भू-भाग में एसीपी के ईष्टतम उपयोग के लिए सीमा के नेपाली भू-भाग में चार स्थलों पर आईसीपी सुविधाएं विकसित करने के लिए भी अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया था । 13 आईसीपी और उन्हें स्थापित करने के लिए प्रस्तावित अनुमानित परियोजना लागत के साथ उनकी सूची नीचे दी गई है :-

 

चरण–I

 (रु. करोड़ में)

क्र.सं. स्थल राज्य सीमा अनुमानित लागत
1. पेट्रापोले पश्चिम बंगाल भारत-बंग्लादेश 172
2. मोरे मणिपुर भारत-म्यांमार 136
3. रक्सौल बिहार भारत-नेपाल 120
4. अटारी (वाघा) पंजाब भारत-बंग्लादेश 150
5. दाउकी मेघालय भारत-बंग्लादेश 50*
6. अखौरा त्रिपुरा भारत-बंग्लादेश 60*
7. जोगबनी बिहार भारत-नेपाल 34*

 

चरण-II

(रु. करोड़ में)

क्र.सं. स्थल राज्य सीमा अनुमानित लागत
8. हिली पश्चिम बंगाल भारत-बंग्लादेश 78*
9. चन्द्रबंघा पश्चिम बंगाल भारत-बंग्लादेश 64*
10. सुतरखंडी असम भारत-बंग्लादेश 16*
11. कावरपुचिआह मिजोरम भारत-बंग्लादेश 27*
12. सुनौली उत्तर प्रदेश भारत-नेपाल 34*
13. रुपैदिहा उत्तर प्रदेश भारत-नेपाल 29*

 

* चार आईसीपी अर्थात् पेट्रापोल, मोरे, रक्सौल और अटारी की परियोजना लागतों को सरकार द्वारा अंतिम रूप दे दिया गया है । शेष 9 आईसीपी की परियोजना लागत की पुष्टि अभी की जानी है ।

 

5. आईसीपी स्थापित करने के लिए 635 करोड़ रु. के व्यय संबंधी सरकार के अनुमोदन को आगे सहमति दी गई थी जिसमें अटारी/वाघा, रक्सौल, मोरे और पेट्रापोल के अलावा आईसीपी के लिए भू-अर्जन संबंधी व्यय के लिए 57 करोड़ रु. की राशि शामिल थी जिसकी परियोजना लागत उपरोक्त सूची अनुसार संस्वीकृत की गई थी ।

 

आईसीपी द्वारा प्रदत्त सुविधाएं:

 

6. आईसीपी एक एकीकृत कॉम्प्लेक्स के अंदर लोगों, वाहनों और सामानों की सुचारू आवाजाही के लिए संप्रभु और गैर-संप्रभु कार्यों को संपादित करने के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की संकल्पना करता है । इनसे प्रवासन, सीमा शुल्क, सुरक्षा, संगरोध आदि की प्रक्रिया सुकर हो जाएगी । ऐसा करने के लिए आईसीपी द्वारा प्रदान की जाने वाली अवसंरचनात्मक सुविधाएं इस प्रकार हैः -

 

  • यात्री टर्मिनल भवन
  • मुद्रा विनिमय
  • इंटरनेट
  • कार्गो प्रसंस्करण भवन
  • कार्गो निरीक्षण शेड्स
  • गोदाम/शीत भंडार
  • संगरोध प्रयोगशाला
  • क्लियरिंग एजेंट बैंक
  • स्कैनर डीएफएमडी /एचएचएमडी
  • सीसीटीवी/पीए तंत्र
  • आइसोलेशन बे
  • पार्किंग
  • कैफेटैरिया
  • सार्वजनिक उपयोग की अन्य सुविधाएं

7. अब तक की प्रगति (दिसंबर, 2011)

 

  • मोरे (मणिपुर) - मोरे के आईसीपी की परियोजना लागत 136 करोड़ रु. है जिसमें भूमि की कीमत, निर्माण, स्कैनर और अन्य विविध व्यय शामिल हैं । मोरे आईसीपी के लिए 38.34 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और गृह मंत्रालय की ओर से असम राइफल्स द्वारा उस पर कब्जा ले लिया गया है । 21.47 करोड़ रु. की क्षतिपूर्ति राशि भू-स्वामियों को पहले ही अदा की जा चुकी है । डीपीआर अनुमोदित किया जा चुका है । मोरे स्थित डीईआर को ईएससी द्वारा 19.10.2011 को आयोजित अपनी 28वीं बैठक में अनुमोदित कर दिया है । मोरे आईसीपी से जुड़ी पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) की तैयारी मेसर्स राइट्स ने शुरू कर दी है । एनआईटी जारी की जा चुकी है ।
  • अखौरा (त्रिपुरा) – अखौरा के आईसीपी की परियोजना लागत 73.50 करोड़ रु. है जिसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है । 8.49 एकड़ भूमि पहले ही अर्जित की जा चुकी है । भू-स्वामियों को 1,55,36,200 रु. की क्षतिपूर्ति राशि पहले ही अदा की जा चुकी है । माननीय गृह मंत्री ने 17 मई, 2011 को इसका शिलान्यास किया । डीपीआर अनुमोदित किया जा चुका है । अखौरा के आईसीपी के लिए विस्तृत इंजीनियरिंग रिपोर्ट पर 25 जून, 2010 को आयोजित अपनी बैठक में ईएससी द्वारा विचार किया गया था । इसे उप-समिति को भेजने का निर्णय लिया गया जो इस रिपोर्ट की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सचिव (बीएम) को सौंपेगी जो यह निर्णय लेंगे कि इस आईसीपी के लिए निविदा आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी करें अथवा नहीं । 6 जुलाई, 2010 को उक्त समिति की बैठक हुई और इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई । ईएससी ने 06.08.2010 को आयोजित अपनी बैठक में उप-समिति द्वारा अनुशंसित रिपोर्ट और डीईआर का अनुमोदन किया । डीईआर के अनुसार परियोजना लागत, जिसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है, के लिए 73.50 करोड़ रु. की राशि अनुमोदित की गई है । निविदा आमंत्रित करने वाली नोटिस को 19 अगस्त, 2010 को जारी कर दिया गया और इसे 30 सितंबर, 2010 को खोला गया । नीलामी की तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन को ईएससी द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है । कार्य ठेकेदार को सौंप दिया गया है । जैसा कि त्रिपुरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सूचित किया है कि इस मामले में पर्यावरण संबंधी स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है ।
  • दाउकी (मेघालय) - दाउकी के आईसीपी की अनुमानित परियोजना लागत 50 करोड़ रु. है । तथापि, वास्तविक लागत का पता विस्तृत इंजीरियरी रिपोर्ट के अनुमोदन के बाद चल जाएगा । मेघालय राज्य सरकार ने लगभग 7.8 एकड़ भूमि अप्रैल, 2010 में बीएसएफ को वास्तविक कब्जे के साथ सौंप दिया है । इस भूमि को आईसीपी स्कीम के अनुमोदन के पूर्व वाणिज्य मंत्रालय ने मौजूदा एलसीएस विकसित करने के लिए अधिगृहित किया है । डीपीआर अनुमोदित किया जा चुका है । 19 अक्तूबर, 2011 को आयोजित ईएससी की 28वीं बैठक में दाउकी के आईसीपी के लिए विस्तृत इंजीनियरी रिपोर्ट पर चर्चा की गई । यह अंतिम रूप दिए जाने के अधीन है । सचिव (बीएम) ने 08.12.2011 को दाउकी स्थित आईसीपी के प्रस्तावित स्थल का दौरा किया । उन्होंने परियोजना प्रबंधन कंसल्टेंट से आईसीपी दउकी से यातायात संबंधी सुचारू आवाजाही के लिए जमीनी स्तर पर वास्तविक सर्वेक्षण करने और अधिगृहित किए जाने वाले अतिरिक्त आवश्यक भूमि की जरूरत का आकलन करने के लिए कहा ताकि विस्तृत इंजीनियरी रिपोर्ट को अगली शक्ति प्राप्त विषय निर्वाचन समिति (ईएससी) की बैठक में अनुमोदित किया जा सके ।
  • सुतरखांडी (असम) – सुतरखांडी आईसीपी की संभावित परियोजना लागत 16 करोड़ रु. था । तथापि, वास्तविक लागत का पता विस्तृत इंजीरियरी रिपोर्ट के अनुमोदन के बाद चल जाएगा । राज्य सरकार से यह अनुरोध किया गया है कि वह इस प्रयोजन के लिए भूमी की पहचान करें और इस संबंध में उनकी ओर से प्रतिक्रिया प्राप्त होने की प्रतीक्षा है । इसी बीच मेसर्स राइट्स से उस स्थल का दौरा करने और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करने का अनुरोध किया गया है । सीमा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थल दौरे का भी प्रस्ताव है ।
  • कावरपुचिआह (मिजोरम) – कावरपुचिआह आईसीपी की संभावित परियोजना लागत 27 करोड़ रु. है । तथापि, वास्तविक लागत का पता विस्तृत इंजीरियरी रिपोर्ट के अनुमोदन के बाद चल जाएगा । मिजोरम राज्य सरकार से कावरपुचिआह में आईसीपी की स्थापना के लिए उपयुक्त भू-खंड की पहचान करने का अनुरोध किया गया था । उन्होंने एक भू-खंड की पहचान की है और सुझाव दिया है कि आईसीपी की स्थापना के लिए गृह मंत्रालय के द्वारा इसे हाथ में ले लिया जाए । यह भूमि बंग्लादेश से लगी नदीय सीमा पर स्थित है जिसका वर्तमान में बंग्लादेश के साथ कोई संपर्क नहीं है । दोनों देशों को जोड़ने के लिए इस नदी पर पुल बनाने की आवश्यकता होगी । तथापि, कावरपुचिआह में बंग्लादेश के साथ कोई भू-सीमा मौजूद नहीं है इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि इस भूमि की उपयुक्तता के आकलन और संपर्क, सुरक्षा, औपचारिक व्यापार आदि को बढ़ाने आदि के मुद्दों को सुलझाने के लिए गृह मंत्रालय के एक अधिकारी, मेसर्स राइट्स, विदेश मंत्रालय, सीमा शुल्क, बीएसएफ, सीपीडब्ल्यूडी आदि के प्रतिनिधियों वाली अंतर्मंत्रालयीय समिति इस स्थल का दौरा करे ।
Page Maintained By: 
सुश्री मर्सी Epao, उप सचिव

गतिविधियां

क्षमतानिर्माण और तकनीकी सहायता

वित्त मंत्रालय का एनई पैकेज-एसआईडीएफ

एनईआर विजन 2020

एनई राज्यों के लिए प्रधानमंत्री पैकेज

विकास सेमिनार