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नागरिक उड्डयन में मुद्दे

पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम में नागर विमानन संबंधी मुद्दे- भावी स्वरूप

 

1. यह कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में संपर्क और अवसंरचना सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें कोई दोहराव नहीं है । अकसर बताए गए कारण इस प्रकार हैः

  1. क्षेत्र हवाई संपर्क को यात्रा के लिए एक पर्याय ही नहीं देते बल्कि एक आवश्यक आवश्यकता है ।
  2. सड़क और रेलवे में अत्यधिक पूंजी की आवश्यकता होती है । हवाई संपर्क संबंधी अवसंरचना का विकास अपेक्षाकृत सस्ता है और इसलिए कमी की दृष्टि से यह अत्यधिक उपयुक्त है ।
  3. विकास के महत्व वाले क्षेत्र और वे क्षेत्र जिनमें पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ रखता है, वे हैं- कृषि, पर्यटन और सेवाएं ।
  4. नाशवान कृषि उत्पादों की आवाजाही के लिए इस क्षेत्र के भीतर और बाहर बाजार ढूंढ़ने के लिए कार्गो की त्वरित और विश्वसनीय आवाजाही अति आवश्यक है ।
  5. पर्यटन संभावनाओं के दोहन के लिए पर्यटन सर्किट विकासित करने के लिए ।
  6. शिलांग जैसे कुछ शहरों को शैक्षणिक केंद्रों के रूप में विकसित करना जिसके लिए हवाई यातायात से मदद मिल सकती है ।
  7. प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मरीजों को यहां से निकालने के लिए ।
  8. सामरिक कारण ।
  9. विशेषकर पड़ोसी देशों और आशियान के लिए इस क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खोलना ।

2. हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत मुद्दें

  1. हवाई अड्डों के विकास और रख-रखाव के लिए उच्च लोक निवेश- इसमें हवाई अड्डों को चलाने के लिए अवसंरचना विकास और बारंबार व्यय दोनों ही शामिल हैं जो कभी-कभी बेहतर सेवाओं में बाधा बन जाते हैं ।
  2. चूंकि हवाई अड्डों का विकास पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है इसलिए ट्रैफिक और कार्गो आवाजाही को आकर्षित करने के लिए अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक निवेश 'ट्रैफिक नीड्स' के पहले आना चाहिए ।
  3. नये हवाई अड्डों के विकास के लिए सार्वजनिक निवेश का वितरण ।
  4. नागर विमानन मंत्रालय द्वारा अपेक्षाकृत छोटे हवाई अड्डों के प्रचालन और रख-रखाव के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को बजटीय सहायता ।
  5. अंतरा-क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए प्रचालकों को हवाई प्रचालन के लिए बजटीय समर्थन/व्यवहार्यता अंतर निधीयन ।
  6. मार्ग आबंटन दिशा-निर्देशों की कड़ाई से मॉनिटरिंग ।
  7. विमानन क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के कौशल विकसित करना ।
  8. भूमि अधिग्रहण और अन्य सहायता संबंधी गतिविधियों में राज्य सरकार द्वारा सक्रिय भूमिका ।

3. आइजॉल में 2007 में ' वायु संपर्क ' विषय पर पूर्वोत्तर परिषद के छठे क्षेत्रिय सम्मेलन में अन्य बातों के साथ-साथ ''11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में 50 हवाई अड्डे/हवाई पट्टी तक प्रचालन और मौजूदा हवाई अड्डों/हवाई पट्टियों में समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधार करते हुए वायुयान के उचित प्रकार का इस्तेमाल करते हुए इस क्षेत्र के भीतर प्रति सप्तहा 600 तक उड़ानें प्रदान करने के लक्ष्य '' की घोषणा की गई ।

 

4. विशिष्टताएं

  1. मौजूदा हवाई अड्डों में अवसंरचना का विकास- रात्रि लैंडिंग सुविधाएं रनवे, नौचालन सुविधाएं, टर्मिनल, सीटी साइड विकास, उपकरण लैंडिंग प्रणाली ।
  2. नाशवान कार्गो के भंडारण और आवाजाही के लिए सुविधाओं का विकास (बागवानी और पुष्पकृषि के लिए) ।
  3. गुवाहाटी, अगरतला और डिब्रूगढ़ को केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सुविधाएं- हैंगर आद ।
  4. निम्नलिखित क्षेत्रों में गैर-प्रचालनगत/ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का विकासः

     

    1. अरुणाचल को खोलना
    2. असम का पश्चिमी हिस्सा – कोकराझार
    3. त्रिपुरा का उत्तरी हिस्सा -कैलाशहार/ या कमालपुर
    4. नागालैंड का उत्तरी हिस्सा - वर्तमान में कोई हवाई अड्डा मौजूद नहीं है।
    5. मिजोरम का दक्षिणी हिस्सा – हमें व्यापार यातायात के लिए एक हवाई अड्डे पर विचार करना चाहिए जो कलादान बहु-मॉडलीय परियोजना के विकास के साथ आ सकता है ।
    6. मेघालय के लिए शिलांग और तुरा (ये प्रचालनगत हवाई अड्डे हैं) तुरा से कोई उड़ान नहीं है वहीं शिलांग से उड़ानें हैं पर नियमित नहीं हैं ।

5. हवाई अड्डावार स्थिति

 

6. प्रचालनगत हवाई अड्डों के विषय में अन्य मुद्दे

  1. लेंगपुइ (मिजोरम सरकार) और तुरा (मेघालय सरकार) जैसे हवाई अड्डों को लेकर स्वामित्व के मुद्दे हैं । इन पर राज्य सरकारों का स्वामित्व है । इन्हें सौंपने को लेकर बातचीत चल रही है । विमानपत्तन प्राधिकरण के स्वामित्व में आने वाले नये हवाई अड्डों को चलाने के लिए इसे बजटीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए ।
  2. जोरहाट, बागडोगरा और तेजपुर भारतीय वायुसेना के अधीन हैं ।
  3. आईएलएस की अनुपस्थिति में अथवा अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां लैंडिंग नियमित नहीं है जिससे उपभोक्ताओं के विकास में कमी आई है जिसके फलस्वरूप मांग में कमी आई है । इस कारण से हवाई अड्डे की सुविधाओं का उपयोग कम हो रहा है ।

7. प्रचालन संबंधी मुद्दे

  1. जैसाकि निम्नलिखित आंकड़ों से पता चलता है कि विगत वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में यात्री यातायात और उड़ानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई हैः
वर्ष विमानों की आवाजाही यात्री माल (टन में)
सं. % परिवर्तन सं. (लाख में) % परिवर्तन सं. % परिवर्तन
2004-05 33019 4.5 % 14.47 10.8 % 10304 13.4%
2005-06 34036 3.1 % 16.20 12.0 % 11006 6.8%
2006-07 42069 23.6 % 22.72 40.2 % 9836 -10.6%
2007-08 55471 31.9 % 28.61 25.9 % 11260 14.5%
2008-09 58843 6.1 % 29.77 4.1 % 13346 18.5%
2009-10 62307 5.9% 36.28 21.8% 18947 42.0%
2010-11 67393 8.2% 45.10 26.5% 24087 27.1%
  1. कम बुकिंग और अनुपयुक्त मौसम की स्थिति दोनों ही महत्वपूर्ण कारणों से अकसर बुकिंग रद्द की जाती है ।
  2. कुछ क्षेत्रों में यह आम धारणा है कि इस क्षेत्र में हवाई किराए महंगे हैं ।
  3. इन क्षेत्रों से प्रातः काल में उड़ानों के टेकऑफ कराने (पूर्वोत्तर क्षेत्र में जल्दी सुबह होने का लाभ लेते हुए ) और उसी दिन शाम तक वापसी को संभव बनाने के लिए वर्तमान में गुवाहाटी और भविष्य में अगरतला और डिब्रूगढ़ में उपयुक्त प्रचालनगत केंद्र का निर्माण । पूर्वोत्तर परिषद के साथ समझौता ज्ञापन के अनुसार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण गुवाहाटी में मात्र एक एटीआर तैनात कर रहा है जो राजधानी वाले अन्य दूसरे शहरों से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है ।

8. गुवाहाटी और अन्य स्थानों पर केंद्र (हब) से जुड़े मुद्दे

  1. हैंगरों की अनुपलब्धता
  2. होटलों और पर्याप्त मानकों के अभाव के कारण पायलट और क्रू गुवाहाटी में रात में रुकना नहीं चाहते हैं ।
  3. इस क्षेत्र में रख-रखाव करने वाले कर्मचारियों की तैनाती नहीं- विमानन के क्षेत्र में प्रशिक्षित स्थानीय लोगों की पर्याप्त संख्या नहीं है ।

9. अपेक्षाकृत छोटे वायुयानों का उपयोग

  1. शॉर्ट हॉल अंतरा पूर्वोत्तर संपर्क के लिए क्षेत्र के अनुकूल, उपयुक्त आकार वाली, बहुपयोगी (कार्गो-यात्री उपयोग में आसानी से बदले जाने वाले) वायुयान की आवश्यकता- इस पर विचार नहीं किया जाना है कि एअरलाइंस की स्कीमों में इस तरह के विमान क्यों फिट नहीं बैठते ।
  2. क्या ये वाणिज्यिक दृष्टि से व्यवहार्य हैं ?
  3. स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता
  4. इन विमानों के लिए पायलटों की उपलब्धता । ये पायलटों को इच्छिक कैरियर प्रगति का मार्ग प्रदान नहीं करता है ।

10. हवाई अड्डों के खुलने का समय

 

मौजूदा हवाई अड्डों के खुलने का समय बेहतर और गहन हवाई प्रचालन में बहुत बड़ी बाधा है । हवाई अड्डों के खुलने का समय थोड़ा बढ़ा दिया जाए और उपयुक्त बना दिया जाए तो उड़ानों के लिए मौके बढ़ सकते हैं । लेकिन यहां विशेषकर एएआई द्वारा एटीसी स्टाफ और जनशक्ति की उपलब्धता मुद्दा है । हवाई अड्डे के लंबे समय तक खुलने से गैर अनुसूचित एअरलाइनों को भी प्रचालन में प्रोत्साहन मिल सकता है । अवसंरचना संवर्द्धन और देर तक हवाई अड्डे खुला रखने से और भी उड़ानों पर प्रभाव पड़ेगा । अवसंरचना संवर्द्धन, हवाई अड्डा खुला रखने के समय में वृद्धि और गुवाहाटी-अगरतला को केंद्र बनाने और यात्रियों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दों के मूल्यांकन की आवश्यकता है ।

 

11. गैर अनुसूचित प्रचालकों के प्रचालन

 

गैर अनुसूचित प्रचालकों को इस क्षेत्र में कार्गो और यात्री दोनों ही के आवाजाही में लचीले और ईष्टतम आकार के विमान ला सकते हैं । सरकार ने निम्नलिखित को प्रारंभिक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया हैः

  1. केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर अनुसूचित वायु सेवा के प्रचालन के लिए मेसर्स स्काई किंग एविएशन ।
  2. पूर्वोत्तर क्षेत्र में शॉर्ट हॉल फीडर वायुसेवा के साथ गैर अनुसूचित प्रचालनों के लिए मेसर्स सूर्या एअर ।
  3. क्षेत्रीय अनुसूचित एअरलाइन संकल्पना के तहत सरकार ने पूर्वी और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में अनुसूचित क्षेत्रीय वायु यातायात सेवाओं के प्रचालन के लिए जैव (जेडएवी) एअर को प्रारंभिक अनापत्ति प्रमाण पत्र किया है ।

इनमें से किसी भी संस्थान में प्रचालन आरंभ नहीं किया है । नॉर्थ इस्ट सटल्स प्रा.लि. लेंगपुई, सिलचर, इंफाल और अगरतला में प्रचालनरत था । इसने अब प्रचालन बंद कर दिया है । गैर अनुसूचित प्रचालकों को प्रोत्साहित करनेकी जरूरत है जो छोटे स्टेशनों के लिए उपयुक्त छोटे विमान ला सकते हैं ।

  1. उत्तर पूर्वी क्षेत्र में सभी अनुसूचित प्रचालकों के लिए लैंडिंग और पार्किंग फीस माफ कर दी गई है । कंपनी ने इस माफी को गैर अनुसूचित प्रचालकों को भी देने का अनुरोध किया है ।
  2. आइजॉल और शिलांग में हवाई अड्डों पर प्रचालन समय में वृद्धि करना ताकि अधिक मार्गों पर विमान प्रचालन हो सके । मिजोरम सरकार ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को भी लिखा है ताकि निर्बाध वायु सेवा संभव हो सके ।
  3. पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनुसूचित प्रचालकों प्राप्त ईंधन राजसहायता गैर अनुसूचित प्रचालकों को भी दी जानी चाहिए ।
  4. वायुयान पट्टा रेंटल भुगतानों पर लगने वाले कर से छूट दी जानी चाहिए ।

12. डीजीसीए के मार्ग वितरण दिशा-निदेशों का प्रचालन

 

यद्यपि इस क्षेत्र में विमान प्रचालन की संख्या और यात्रियों की संख्या में खासा बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अंतर-एनईआर प्वाइंटों को मार्गों का वितरण नहीं किया गया है । इसलिए डोनर मंत्रालय का यह विचार है कि उड़ानों के फैलाव को बढ़ावा देने के लिए 10 प्रतिशत मार्ग वितरण दिशा-निदेश की व्याख्या पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त है ।

 

13. अंतर्राष्ट्रीय संपर्क

 

पड़ोसी और आशियान देशों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संपर्क को प्रोत्साहित किया जाना है । वर्तमान में गुवाहाटी से कोई अंतर्राष्ट्रीय उड़ान नहीं है जोकि एकमात्र विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है । इस क्षेत्र का म्यांमार या बंग्लादेश के साथ कोई वायु संपर्क नहीं है । वस्तुतः म्यांमार पहुंचने के लिए बैंकॉक जाना पड़ता है ।

 

14. कुल मिलाकर डोनर मंत्रालय का यह विचार है कि इस क्षेत्र में वायु संपर्क को प्रोत्साहन और इसका वितरण आर्थिक विकास पर बहुआयामी प्रभाव डाल सकता है । इसके लिए नागर विमानन मंत्रालय द्वारा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को पुनरावर्ती और अवसंरचनात्मक व्यय के लिए गंभीर बजटीय सहायता पहुंचाना बहुत जरूरी है ।

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श्री उदय शंकर, निदेशक

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