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म्यांमार

म्यांमार के साथ द्विपक्षीय परियोजनाएं और एनईआर के साथ संपर्क और व्यापार को


बढ़ावा देने के लिए भारतीय परियोजनाएं

 

(जून2012 तक ये परियोजनाएं संकल्पनागत तैयारी से लेकर डीपीआर की तैयारी तक की विभिन्न चरणों में हैं ।)

  1. कलादान मल्टी मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना - कृपया इस साइट के ' अवसंरचना ' कॉलम के अंतर्गत अंतर्देशीय जलमार्ग खंड देखें ।
  2. जोरिनपुरी, मिजोरम में भू-सीमा शुल्क केंद्रों की स्थिति – लोंगतलाई जिले में स्थित जोरिनपुई वह स्थान है जिसे कलादान बहु-मॉडल परियोजना के लिए मिजोरम में भारत-म्यांमार सीमा पर नये भू-सीमा शुल्क केंद्र के लिए चुना गया है । यह स्थान बेहद दुरस्त है । जोरिनपुई सीमा रेखा पर स्थित है और यह म्यांमार के सीट्टवे पत्तन से 287 किमी. दूर है । इस केंद्र के स्थापित होने पर जोरिनपुई एलसीएस के वाणिज्यिक उपयोग के लिए कलेतवा-पलेतवा के बीच सड़क निर्माण (129 किमी.) और इनके बीच अंतर्देशीय जल परिवहन का विकास और सिट्टवे पत्तन (158 किमी.) को आरंभ किया जाना है ।

     

    म्यांमार की अंतर्मंत्रालयी दल और अधिकारीगण ने अप्रैल, 2012 में इस स्थल का दौरा किया । मिजोरम सरकार भू-सीमा शुल्क केंद्र विकसित करेगी । अप्रैल, 2012 में विदेश सचिव की अगुवाई वाली अंतर्मंत्रालयी दल ने भारत-म्यांमार सीमा का दौरा किया । म्यांमार सरकार के अधिकारीगण भी वहां मौजूद थे । मई, 2012 में म्यांमार के माननीय प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान संयुक्त वक्तव्य में जोरिनपुई से जुड़ा समझौता शामिल किया गया । वाणिज्य विभाग की असाइड(एएसआईडीई) स्कीम की निधियां मिजोरम सरकार को जोरिनपुई में सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध होगी ।
  3. म्यांमार में तमु-कलेवा-कलेम्यो मैत्री मार्ग पर 71 पुलों की मरम्मत/उन्नयन – मोरे से आरंभ होकर सीमा की दूसरी ओर जाने वाली तमू-कलेवा-कलेम्यो मैत्री मार्ग बीआरओ की मदद से भारत द्वारा बनाया गया है । यह मार्ग म्यांमार के प्राधिकरणों को सौंप दिया गया है । तथापि, इस मार्ग पर 71 जर्जर पुल हैं जिसकी मरम्मत भारत सरकार बीआरओ के माध्यम से नहीं कराएगी । यह त्रि-पक्षीय राजमार्ग का हिस्सा है ।
  4. भारत में मोरे से थाईलैंड में मए वाया म्यांमार परिवहन संपर्क के लिए त्रि-पक्षीय राजमार्ग- संयुक्त कार्य बल का पुनरुद्धार । दोनों नेता 2016 तक निर्बाध त्रि-पक्षीय संपर्क स्थापित करने के मुद्दे पर सहमत हुए – त्रि-पक्षीय राजमार्ग भारत में मोरे से थाईलैंड में मए शोट वाया म्यांमार संपर्क सुनिश्चित करेगा । म्यांमार में सड़क और सेतु मार्गों के लिए डीपीआर तैयार करने में काफी प्रगति हुई है । दो मार्ग विचाराधीन है, जिसमें से एक मांडले और दूसरा मांडले से इतर होकर गुजरेगा । म्यांमार ने मांडले से होकर मार्ग के लिए भारत द्वारा स्वीकृत किए जाने का अनुरोध किया है । जैसे ही इंफाल-मांडले बस सेवा आरंभ होगी तो त्रिपक्षीय राजमार्ग का मांडले से होकर गुजरना वांछित होगा जो प्रमुख वाणिज्यिक नगर है । दो मार्ग हैं :
    • मोरे (भारत) – तामु-कलेवा-चाउंगमा-यिनमाबिन-पाले-क्यादेत-लिंगदो-पकोक्कु-बगान-क्योकपाडोंग-मैकतिला बाईपास-टोंगु-ओक्टविन-पयाग्यी-थिनज्यात-थाटोन-ह्पान कवरेक-मयावड्डी-मए सॉट (थाईलैंड) (मांडले से इतर)
    • मोरे (भारत) – तामु-कलेवा-याग्यी-चाउंगमा-मनिवा-मांडले-मैकतिला बाईपास-टाउंगू-ओक्टविन- पयाग्यी-थिनज्यात-थाटोन-ह्पान कवरेक-मयावड्डी-मए सॉट (थाईलैंड) (मांडले से होकर)

     

    क्र.सं. विस्तार टिप्पणियां
    1. तमु-कलेवा फ्रेडशीप रोड का हिस्सा.  स्थिति अच्छी ।
    2. कलेवा -याग्यी म्यांमार चाहता है कि भारत  कलेवा-याग्यी विस्तार का निर्माण करे ।
    3. याग्यी-चाउंगमा-मोनीवा भारत चाहता है कि म्यांमार  याग्यी-चाउंगमा-मोनीवा विस्तार का निर्माण करे । समझा जाता है कि याग्यी-चाउंगमा-मोनीवा का हिस्सा बीओटी आधार पर निर्माणाधीन है ।
    4. मोनीवा-मांडले मोनीवा-मांडले स्ट्रेच पहले से ही विकसित है  ।
    5. मांडले -मैकटिलस बाईपास विदेश मंत्रालय   स्थिति  की जानकारी देने वाला है ।
    6. मैकटिला बाइपास-तौंगू-ऑक्टविन-पयाग्यी  मैकटिला और पयाग्यी के बीच का भाग यांगून-मांडले राजमार्ग का हिस्सा है जिसका निर्माण किया जा चुका है ।
    7. पयाग्यी-थेनजयाट-थाटॉन विदेश मंत्रालय   स्थिति  की जानकारी देने वाला है ।
    8. थाटॉन-मॉलामैइने-कॉकारेक  समझा जाता है कि थाटॉन-मॉलामैइने-कॉकारेक क्षेत्र के लिए म्यांमार सरकार ने एडीबी से सीधे ऋण की मांग की है ।
    9. कॉकारेक-मयावाडी ऐसा प्रतीत होता है कि म्यांमार सरकार शीघ्र अपने संसाधनों से म्यांवड्डी-कावकरेक के बीच सड़क निर्माण पूरा करेगी ।
    10. मयावाडी –मेइ सोट मीआ से टेल तक की स्थिति

    आशा है कि भारत और म्यांमार के बीच इस मुद्दे पर शीघ्र सहमति हो जाएगी । वर्तमान में इस परियोजना के लिए पूर्ण होने की कोई प्रत्याशित तारीख नहीं है ।
  5. कलेवा-याग्यी सड़क खंड का उन्नयन-म्यांमार को सहायता - सड़क का यह विस्तार प्रस्तावित त्रि-पक्षीय राजमार्ग का हिस्सा है । म्यांमार ने भारत से इसे बनाने का अनुरोध किया है ।
  6. म्यांमार में रि-टिड्डिम सड़क (जोखावथार-रि से कलेम्यो वाया टिड्डिम) – म्यांमार की ओर से जोखवथार एलसीएस को जोड़ने वाली वर्तमान सड़क कलेम्यो वाया टिड्डिम सड़क से अधिक कच्ची है जिसे शुष्क मौसम में ही बिछाया जा सकता है । जोखावथार में भारतीय सीमा और म्यांमार में रि शहर के बीच 4-5 किमी. का सड़क विस्तार के उन्नयन की आवश्यकता है और जोखावथार से रि और इससे आगे निर्बाध संपर्क के लिए अति आवश्यक है । रि-टिड्डिम सड़क मोनिवा और आगे मांडले को जोड़ेगा । यह मिजोरम में जोखावथार और मांडले के बीच संपर्क प्रदान करेगा ।

     

    म्यांमार के राज्य शांति और विकास परिषद के अध्यक्ष के भारत दौरे के समय यह निर्णय लिया गया था कि म्यांमार ने रि-टिड्डिम सड़क के निर्माण और पुनः मरम्मत के लिए भारत की ओर से 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता अनुदान के जरिए वित्तपोषित होगा । इस समय यह सड़क जर्जर हालत में है । भारतीय सहयोग से इसे एकल लेन सड़क बनाया जाएगा । इस सड़क से म्यांमार और मिजोरम के बीच व्यापार और यात्रा को बढ़ावा मिलेगा और जोखावथार एलसीएस में किए गए निवेश को ईष्टतम बनाने में मदद मिलेगी । म्यांमार में रि-टिड्डिम सड़क जोखावथार में एलसीएस सुविधाओं के विकास के लिए पहले से किए जा चुके निवेश में से कीमत प्राप्त करने के लिए अतिआवश्यक है ।

     

    इरकॉन ने 80 किमी. रि-टिड्डिम सड़क के लिए 298 करोड़ रु. का अनुमान तैयार किया है । विदेश मंत्रालय ने आयोजना व्यय (सीएनई) समिति की मंजूरी प्राप्त कर ली है । यह निर्माण आवश्यक अनुमोदनों के तीन वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा । भारत म्यांमार को अनुदान सहायता देकर वहां रि-टिड्डिम सड़क विकास परियोजना के कार्यान्वयन के लिए सहमत हो गया है । विदेश मंत्रालय ने इस सड़क के लिए मॉर्थ से तकनीकी सहायता मांगी है ।
  7. एशियाई राजमार्ग नेटवर्क संपर्क
  8. इंफाल और मांडले के बीच बस सेवा (म्यांमार) – इंफाल और मांडले के बीच बस सेवा वहां की सरकार और आम लोगों की बड़ी पुरानी मांग रही है । मणिपुर विधानसभा मं तत्संबंधी एक संकल्प भी पारित कर चुका है ।

     

    अप्रैल, 2012 में मॉर्थ के संयुक्त सचिव की अगुवाई वाली अंतर्मंत्रालयी दल के मोरे दौरे के बाद मॉर्थ की ओर से विदेश मंत्रालय को प्रस्ताव सौंपा गया था । इस मामले पर भारत और म्यांमार के बीच विचार-विमर्श भी हो चुका है । म्यांमार सरकार के साथ विचार-विमर्श के लिए मॉर्थ की ओर से एक दल भी म्यांमार गया था । मॉर्थ ने बस सेवा के संबंध में द्विपक्षीय समझौते के मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त कर लिया है । माननीय प्रधानमंत्री की मई, 2012 की म्यांमार यात्रा के दौरान इस मामले को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका । द्विपक्षीय विचार-विमर्श जारी है ।

     

    प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग हैं:

     

    रूट 1 इंफाल –मोरे- तामु से मांडले: तामु --> कालय--> गंगाव --> पाले --> मोनीवा --> मांडले
    रूट 2 इंफाल –मोरे - तामु से मांडले : तामु --> कालय (काइकोने)--> कालेवा --> याग्यी -->मोनीवा --> मांडले
    रूट 3 इंफाल –मोरे- तामु से मांडले : तामु --> कालय --> गंगाव --> पाकोककु - ->बगान (न्यूंगु) --> क्योकपाडौंग --> मैकटिला --> मांडले

     

    सड़क की लंबाई 510 मील /821 किमी. (इस मार्ग का उपयोग सभी मौसमों में किया जा सकता है ।)

  9. सीमा प्रबंधन विभाग द्वारा मोरे (मणिपुर) में एकीकृत चेकपोस्ट का विकास - एकीकृत चेकपोस्ट (आईसीपी) की परियोजना लागत 136 करोड़ रु. है जिसमें भूमि की लागत, निर्माण, स्कैनर और अन्य विविध व्यय शामिल हैं । मोरे आईसीपी के लिए 38.34 एकड़ भूमि के अर्जन का कार्य पूरा हो चुका है और गृह मंत्रालय की ओर से असम राइफल्स द्वारा उस भूमि पर कब्जा लिया जा चुका है । क्षतिपूर्ति की 21.47 करोड़ रु. की राशि पहले ही भू-स्वामियों को अदा की जा चुकी है । डीपीआर अनुमोदित हो चुका है । मोरे स्थित डीईआर को ईएससी द्वारा 19-10-2011 को आयोजित अपनी 28वीं बैठक में अनुमोदन दिया जा चुका है । मोरे आईसीपी से संबंधित पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट की तैयारी मेसर्स राईट्स द्वारा आरंभ कर दी गई है । एनआईटी जारी किया जा चुका है ।
  10. अरुणाचल प्रदेश के पांगसाउ दर्रे में सीमा हाट – मई, 2004 में माननीय प्रधानमंत्री के म्यांमार दौरे के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार भारत-म्यांमार सीमा पर पहला सीमा हाट खोलने के लिए इस स्थान को लेकर भारत और म्यांमार के बीच आपसी समझौता हो चुका है ।
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सुश्री मर्सी Epao, उप सचिव

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