Print

औचित्य

पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा वार्षिक बजटों का 10% निर्धारित करने का औचित्य

 

 

 

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए 10% जीबीएस क्या है ?

 

केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा अपने वार्षिक योजना बजटों का 10% पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए निर्धारित किया जाना केंद्र सरकार द्वारा एनईआर के विकासात्मक पिछड़ेपन को दूर करने की दिशा में साहसिक कदम है । केंद्र सरकार के 52 मंत्रालयों की वार्षिक बजट का 10 % एनईआर में खर्च करने के लिए 1998-99 से प्रतिवर्ष अलग रखा जाता है, यद्यपि एनईआर में भारत के कुल भूभाग का 7.9 % (3287263 वर्ग किमी. में से 262179 वर्ग किमी.) और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी कुल आबादी का 3.76 % (121 करोड़ में से 4.55 करोड़) है ।

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने कई उपायों को रेखांकित करते हुए अक्तूबर 1996 में 'पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए नई पहल' की घोषणा की । उनमें से एक नीतिगत निर्णय यह था कि केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के योजना बजट (टों) का कम से कम 10 प्रतिशत एनई राज्यों के विकास के लिए रखा जाए । योजना आयोग द्वारा विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के साथ किए गए प्रारंभिक पारस्परिक क्रियाकलाप से यह बात सामने आई कि वर्ष 1997-98 के दौरान कुछ केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा पूर्वोत्तर पर व्यय उस वर्ष के लिए निर्धारित 10% के जीबीएस से कम रहा । इसके बाद योजना आयोग ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 10% की खर्च न की गई निर्धारित राशि में से केंद्रीय संसाधन पूल बनाने की संभावना का पता लगाया ताकि पूर्वोत्तर में अवसंरचनात्मक विकास परियोजनाओं को सहायता दी जा सके ।

 

वर्ष 1998–1999 से भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग (विशेषकर इससे छूट प्राप्त कुछ मंत्रालयों/विभागों को छोड़कर) बाह्य सहायता प्राप्त स्कीमों के लिए कम आबंटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यय के लिए स्थानीय या कार्यक्रम विशिष्ट स्कीमों/परियोजनाओं के लिए अपने वार्षिक बजट का कम से कम 10% अलग निकाल रहे हैं । वर्तमान में 52 गैर-छूट प्राप्त मंत्रालय/विभाग (रेलवे मंत्रालय और हाल ही में सृजित फार्मास्युटिकल्स विभाग सहित) हैं जो एनईआर के लिए निधियां निकाल रहे हैं ।

 

गैर-छूट प्राप्त मंत्रालयों द्वारा निकाली गई राशियों में से उपयोग नहीं किए जा सके हिस्से को वित्तीय वर्ष के अंत में अव्यपगत संसाधन पूल में सरेंडर कर दिया गया जिसका रख-रखाव आर्थिक मामले विभाग, वित्त मंत्रालय के बजट प्रभाग द्वारा प्रोफार्मा आधार पर किया जाता है ।

 

पूल का आकार

 

राष्ट्रीय अव्यपगत पूल में अप्रैल, 2011 तक अनुमानित शेष 8417.32 करोड़ रु. है ।

 

प्रोद्भवन और निर्मुक्तियां

 

1998-99 से कल्पित अव्यपगत पूल का प्रोद्भवन संबंधी ब्यौरा इस प्रकार है:

 

क्र.सं. वर्ष अव्यपगत निधि में प्रोद्भवन (करोड़ रु.)
1 1998-99 1189.85
2 1999-2000 1571.78
3 2000-01 1440.60
4 2001-02 1603.84
5 2002-03 1339.70
6 2003-04 657.24
7 2004-05 663.35
8 2005-06 1960.12
9 2006-07 1311.08
10 2007-08 1761.03  
11 2008-09 2009.16  
12 2009-10 1705.70
13 2010-11 [वित्त मंत्रालय की ओर से लेखे की पुष्टि अभी की जानी है ।]
  कुल 17213.45

 

 

1998-99 से एनएलसीपीआर स्कीम के तहत निर्मुक्तियां:

 

 

क्र.सं. वर्ष एनएलसीपीआर स्कीम के तहत निर्मुक्तियां (करोड़ रु.)
1 1998-99 106.34
2 1999-2000 409.96
3 2000-01 309.25
4 2001-02 491.57
5. वर्ष 1998-99 से 2009-10 के दौरान एनएलसीपीआर में एनईसी का डेबिट व्यय 1605.38
6 2002-03 550.00
7 2003-04 550.00
8 2004-05 650.00
9 2005-06 679.18
10 2006-07 689.83
11 2007-08 636.00
12 2008-09 650.00
13 2009-10 668.62
14 2010-11 800.00
  कुल 8796.13

 

कल्पित अव्यपगत पूल में संचयी प्रोद्भवन [2009-10 तक] 17213.45 करोड़ रु.
एनएलसीपीआर के तहत संचयी निमुर्क्ति [2010-11 तक] 8796.13 करोड़ रु.

कल्पित अव्यपगत पूल में अनुमानित शेष

8417.32 करोड़ रु. [अनु.]

 

इस पूल का उपयोग किस प्रकार किया जाता है?

 

डोनर मंत्रालय एनईआर के लिए संचयी अव्यपगत संसाधन संचयी पूल के उपयोग के लिए दो योजना स्कीमें क्रियान्वित करता है:

  • केंद्रीय अव्यपगत संसाधन पूल (एनएलसीपीआर)
  • केंद्रीय अव्यपगत संसाधन पूल (एनएलसीपीआर- केंद्रीय)

डोनर मंत्रालय गैर-छूट प्राप्त मंत्रालयों के 10% जीबीएस के व्यय को मॉनिटर करता है ।

Page Maintained By: 
श्रीमती. कीर्ति सक्सेना, आर्थिक सलाहकार

गतिविधियां

क्षमतानिर्माण और तकनीकी सहायता

वित्त मंत्रालय का एनई पैकेज-एसआईडीएफ

एनईआर विजन 2020

एनई राज्यों के लिए प्रधानमंत्री पैकेज

विकास सेमिनार