Print

मार्ग वितरण संबंधी दिशा-निर्देश

नागर विमानन मंत्रालय

 

निर्धारित वायु परिचालकों के लिए मार्ग वितरण संबंधी दिशा-निर्देश

 

(डीजीसीए द्वारा मॉनिटर)

 

  1. वायु परिवहन सेवाओं के बेहतर विनियमन को प्राप्त करने और देश के विभिन्न क्षेत्रों में वायु परिवहन सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 01.03.1994 के आदेश के द्वारा मार्ग वितरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं ।
  1. इन दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी अधिसूचित प्रचालकों को ट्रंक मार्गों (श्रेणी-1 मार्गों) पर अपनी तैनात क्षमता का कम से कम 10 प्रतिशत पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कशमीर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप (श्रेणी-2 मार्गों) पर तैनात करना जरूरी है । इसके अलावा क्षमता का कम से कम 10 प्रतिशत श्रेणी-2 मार्गों पर तैनाती को अनन्य रूप से इन क्षेत्रों के भीतर संपर्क के लिए तैनात करना जरूरी है ।
  1. श्रेणी-। मार्गों पर तैनात क्षमता का 50% श्रेणी-। और श्रेणी-2 मार्गों से इतर मार्गों अर्थात् श्रेणी-3 मार्गों पर तैनात किया जाना है ।
  1. सभी एअरलाइंस मार्ग वितरण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के अधीन देश में कहीं भी प्रचालन के लिए मुक्त हैं ।
  1. विस्तृत मार्ग संबंधी दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:

विभिन्न श्रेणी के मार्गों पर सेवाओं का प्रावधान

 

(i) श्रेणी-I

 

सीधे संपर्क वाले मार्ग

  1. मुंबई-बंगलुरू
  2. कोलकाता-दिल्ली
  3. मुंबई -कोलकाता
  4. कोलकाता-बंगलुरू
  5. मुंबई -दिल्ली
  6. कोलकाता-चेन्नई
  7. मुंबई -हैदराबाद
  8. दिल्ली-बंगलुरू
  9. मुंबई -चेन्नई
  10. दिल्ली-हैदराबाद
  11. मुंबई -तिरुवनंतपुरम
  12. दिल्ली-चेन्नई

(ii) श्रेणी-II

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कशमीर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप स्टेशनों को जोड़ने वाले मार्ग ।

 

(iii) श्रेणी-III

 

श्रेणी-I और श्रेणी-II से इतर मार्ग

 

श्रेणी-। के तहत एक या उससे अधिक मार्गों पर निर्धारित वायु परिवहन सेवा प्रदान करने वाले प्रचालकों को श्रेणी-2 और श्रेणी-3 में निम्नलिखित प्रकार से ऐसी सेवा प्रदान करना जरूरी होगा :

 

प्रचालक श्रेणी-2 के मार्ग पर श्रेणी-1 मार्गों पर तैनात क्षमता का कम से कम 10 प्रतिशत तैनात करेगा और इस प्रकार श्रेणी-2 मार्गों पर सेवाओं अथवा खंडों के लिए तैनाती के लिए आवश्यक क्षमता का कम से कम 10 प्रतिशत अनन्य रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कशमीर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप के भीतर प्रचालित किया जाएगा ।

 

प्रचालक जितनी क्षमता श्रेणी-1 के मार्गों पर तैनात करता है उसका कम से कम 50 प्रतिशत श्रेणी-3 मार्गों पर तैनात करेगा ।

 

नोट 1: श्रेणी-। मार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय वायु सेवा के हिस्से के रूप में प्रचालित सेवा को उपरोक्त प्रयोजन के लिए समझा जाएगा ।

 

नोट 2: तैनात क्षमता को उपलब्ध सीट किलोमीटर (एएसकेएम) समझा जाएगा ।

 

नोट 3: बहु क्षेत्र वाले मार्गों जैसे दिल्ली-कोलकाता-गुवाहाटी-इंफाल, पर दिल्ली-कोलकाता पर प्रदत्त क्षमता को श्रेणी-1 में माना जाएगा और जो कोलकाता-गुवाहाटी क्षेत्र में प्रदान की जाने वाली क्षमता को श्रेणी-2 और गुवाहाटी-इंफाल क्षेत्र पर इस क्षमता को अनन्य रूप से श्रेणी-2 के भीतर समझा जाएगा ।

 

नोट 4: इसके अलावा नागर विमानन मंत्रालय के उक्त आदेश में श्रेणी-2 में चिन्हित मार्गों को कोचीन-अगाती-कोचीन में प्रचालन मार्ग को भी श्रेणी-2ए मार्गों के वर्गीकरण के भीतर समझा जाएगा ।

Page Maintained By: 
श्री उदय शंकर, निदेशक

बुनियादी ढांचे

सामान्य