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स्थिति और भविष्य की योजना

पूर्वोत्तर क्षेत्र में हवाई अड्डे

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र में हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्रों का व्यापक नेटवर्क है जो द्वितीय विश्वयुद्ध की धरोहर है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नागर विमानन मंत्रालय और पूर्वोत्तर परिषद ने हवाई अड्डों की बेहतर अवसंरचना विकसित करने में सहयोग दिया है । यहां अनकवर्ड क्षेत्र मौजजूद हैं जहां वायु संपर्क के लिए अवसंरचना की जरूरत है ।

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र में हवाई अड्डों/हवाई क्षेत्रों की स्थिति को नीचे सारणी में दिखाया गया है:

 

(स्रोत: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण)

(अप्रैल, 2012 तक)

 

क्र. सं. हवाई अड्डा / हवाई क्षेत्र / आधुनिक लैंडिंग ग्राउंड (जिला) स्वामित्व स्थिति योजनाएं
अरुणाचल प्रदेश
1. आलो (पश्चिमी सियांग) रक्षा मंत्रालय (भारतीय वायुसेना) नागरिक एन्क्लेव के लिए भूमि की उपलब्धता के आधार पर इसे दोहरे उपयोग (सैन्य और नागरिक) के लिए विकसित किया जा रहा है । भारतीय वायुसेना (आईएएफ) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) क्रमशः सैन्य और नागरिक एन्क्लेव विकसित कर रहे हैं । राज्य सरकार को यह सूचित करना है कि नागरिक एन्क्लेव के लिए 7 एकड़ भूमि उपलब्ध हो पाएगी अथवा नहीं ।  रक्षा एन्क्लेव का काम मार्च, 2014 तक पूरा हो जाएगा ।
2. पासिघाट (पूर्वी सियांग) एएआई द्वारा भारतीय वायुसेना को हस्तांतरित किया जा रहा है । -वही- एएआई स्वयं के पास रखी 5 एकड़ भूमि पर नागरिक एन्क्लेव बनाएगा । पासिघाट हवाई अड्डे को एएआई से आईएएफ को सौंपने के लिए पट्टा समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है ।
3. जिरो (नीचला सुबनसिरी) रक्षा मंत्रालय (भारतीय वायुसेना) -वही- राज्य सरकार को यह सूचित करना है कि नागरिक एन्क्लेव के लिए 10 एकड़ भूमि उपलब्ध हो पाएगा अथवा नहीं ।  रक्षा एन्क्लेव का काम मार्च, 2014 तक हो पूरा जाएगा ।
4. दापोरिजो (ऊपरी सुबनसिरी) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण राज्य सरकार की ओर से भूमि उपलब्ध कराने पर एएआई द्वारा विकसित किया जाएगा । राज्य सरकार को यह सूचित करना है कि नागरिक एन्क्लेव के लिए  भूमि उपलब्ध होगी अथवा नहीं। 
दापारिजो हवाई अड्डे को एएआई द्वारा एटीआर-42 के लिए विकसित और प्रचालनगत किया जाना है । राज्य सरकार से 34.3 एकड़ अतिरिक्त भूमि का अनुरोध किया गया है और अतिरिक्त भूमि और निधि के प्रावधान के बाद कार्य आरंभ हो सकेगा ।
5. मेचुका (पश्चिमी सियांग) रक्षा मंत्रालय (भारतीय वायुसेना) एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में विकसित किया जा रहा है । मार्च, 2014 तक हो पूरा जाएगा ।
6. तवांग (तवांग) -वही- -वही-  
7. टूटिंग (ऊपरी सियांग) -वही- -वही-  
8. विजयनगर (चांगलांग) -वही- -वही-  
9. वालोंग (अनजॉ) -वही- -वही-  
10. तेजु (लोहित) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण वीएफआर के साथ एटीआर-72 प्रकार के वायुयान वीएफआर के साथ एटीआर-72 प्रकार के वायुयान के लिए विकसित किया जा रहा है । एनईसी की निधियों से विकसित किया जा रहा है। दिसंबर, 2013 तक पूरा हो जाएगा । राज्य सरकार ने एटीआर-72 प्रकार के वायुयान के प्रचालन के लिए उन्नयन/विकास के लिए सितंबर, 2010 में तेजु हवाई अड्डे से लगी अतिरिक्त 108 एकड़ भूमि एएआई को सौंप दी । एनईसी ने वर्ष 2009-10 के दौरान एएआई को 79 करोड़ रु. संस्वीकृत किए ।  कार्य की स्थिति:
  1. हाल ही में अधिग्रहित 108 एकड़ भूमि के चारों ओर चहारदीवारी का निर्माण - 90% पूर्ण ।
  2. नये टर्मिनल भवन, तकनीकी ब्लॉक-सह- नियंत्रण टावर और विद्युत उप-केंद्र – टेंडर को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
  3. इन प्रयोजनों के लिए 28/07/2011 को सौंपे गए कार्य  --
    • रनवे विस्तार, लिंक टैक्सीवे के साथ-साथ नया एप्रन ।
    • लिंक टैक्सीवे के साथ-साथ मौजूदा रनवे और मौजूदा एप्रन (आइसोलेशन बे के रूप में प्रयुक्त )का सुदृढ़ीकरण ।
    • नये कार पार्क का निर्माण ।
नोट: इन कारणों से कार्य रुका हुआ है:
  1. पर्यावरण और वन मंत्रालय के कारण पर्यावरणीय स्वीकृति लंबित ।
  2. स्थानीय हस्तक्षेप और कानून और व्यवस्था की समस्या ।
11. ईटानगर (पापुम पारे) प्रस्तावित ग्रीनफील्ड – प्रस्तावित हवाई अड्डे का प्रस्तावित स्थल विचार-विमर्शाधीन है ।  
असम
12. गुवाहाटी (कामरूप)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण प्रचालनगत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा । इसे अंतर क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है ।
 
  1. 360 मीटर का रनवे विस्तार पहले ही किया जा चुका है और चालू है ।
  2. 11 अतिरिक्त पार्किंग स्टैंडों को एकोमोडेट करने के लिए एप्रन का विस्तार पूर्ण हो चुका है और चालू कर दिया गया है ।
  3. एबी-321 प्रकार के वायुयान रख-रखाव हैंगरों का निर्माण शीघ्र किया जाना है ।  31.10.2011 को 34.98  करोड़ रु. की सहायता अनुदान के लिए डीपीआर एनईसी को प्रस्तुत । योजना आयोग ने अपना अनुमोदन दे दिया है ।
  4. आईएएफ की ओर से भूमि की उपलब्धता के अधीन समानांतर टैक्सी पथ नियोजित ।
  5. रनवे 02 के लिए श्रेणी-। एप्रॉच लाइट लगाने का कार्य आरंभ किया जाएगा जो आईएएफ की ओर से भूमि की उपलब्धता  के अधीन है । 
  6. सिटी साइड विकास के लिए भूमि की उपलब्धता के अधीन नये एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण ।
13. डिब्रूगढ़ (डिब्रूगढ़)(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  ) -वही- प्रचालनगत
  1. रनवे का विस्तार 1829 से बढ़ाकर 2286 मीटर करना और संबंधित कार्य – 01.02.2011 को 60  करोड़ रु. के सहायता अनुदान के लिए डीपीआर एनईसी को प्रस्तुत । योजना आयोग ने अपना अनुमोदन दे दिया है ।
  2. एबी-321 प्रकार के वायुयान रख-रखाव हैंगरों का निर्माण – 31.10.2011 को 22.37  करोड़ रु. की सहायता अनुदान के लिए डीपीआर एनईसी को प्रस्तुत ।
14. लिलाबाड़ी (लखिमपुर)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
-वही- प्रचालनगत
  1. रात्रि लैंडिंग सुविधाएं– नियोजित की जा रही है, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त भूमि के प्रावधान की आवश्यकता है ।
15. जोरहाट (जोरहाट) भारतीय वायुसेना (नागरिक एन्क्लेव) प्रचालनगत
  1. 7.78 करोड़ रु. की लागत से सिविल एप्रन का विस्तार– भूमि के उपयोग के लिए आईएएफ की ओर से एनओसी पहले ही प्राप्त कर लिया गया है, 01.02.2011 को 7.78  करोड़ रु. की सहायता अनुदान के लिए डीपीआर एनईसी को प्रस्तुत । योजना आयोग ने इस परियोजना को अनुमोदित कर दिया है । निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ किया जाएगा । 
  2. राज्य सरकार से सिटी साइड विकास के लिए अनुरोध किए गए 9 एकड़ भूमि के प्रावधान के अधीन नये टर्मिनल का निर्माण । 
16. तेजपुर (सोनितपुरय) -वही- प्रचालनगत --
17. सिलचर (कछार) -वही- प्रचालनगत
  1. भूमि उपलब्धता के अधीन नये घरेलू टर्मिनल का निर्माण ।
18. रूपसी (धुब्री) भारतीय वायुसेना को सौंपा जा रहा है।  इसे दोहरे उपयोग के लिए विकसित किया जाना है । अप्रचालनगत
  1. एएआई हवाई अड्डे को इसके विकास और एटीआर-72 प्रकार के वायुयानों के प्रचालन के लिए आईएएफ को सौंपा जा रहा है । एएआई नागरिक एन्क्लेव का निर्माण और प्रबंधन करेगा ।
  2. उपलब्ध वास्तविक भू-क्षेत्र को असम सरकार के समन्वय से रेखांकित और मूल्यांकित किया जाना है । तद्नुसार हवाई अड्डे के हस्तांतरण के पट्टा समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा । 
मणिपुर
19. इंफाल (इंफाल)   (31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  ) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण प्रचालनगत
  1. रात्रि लैंडिंग सुविधाएं लगा दी गई हैं और 21 मई, 2010 को चालू हो गया है।
  2. बोइंग- 747-400 आकार वाले अपेक्षाकृत बड़े वायुयानों के लिए भावी हवाई अड्डे के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा लगभग 640 एकड़ अतिरिक्त भूमि प्रदान की गई।
  3. एबी-321 हैंगर के लिए वायुयान रख-रखाव हैंगरों का निर्माण-24.67 करोड़ रु. की अनुदान सहायता के लिए 03.11.2011 को एनईसी को डीपीआर सौंप दिया गया ।
  4. चौड़े आकार वाले ‘डी’ श्रेणी के वायुयानों के लिए चरण-। में 350 मीटर तक रनवे विस्तार । 
  5. मौजूदा टीबी विस्तार अर्थात् सिक्योरिटी होल्ड क्षेत्र पूर्ण होने के कगार पर ।  
मेघालय
20. शिलांग (बारापानी) (पूर्वी खासी हिल्स)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण प्रचालनगत
  1. हाल ही में अधिग्रहित भूमि के चारों ओर चहारदीवारी का निर्माण – परिधि दीवार आदि सहित सुरक्षा और रक्षा संबंधी अवसंरचना के लिए 26.7 करोड़ रु. के सहायता अनुदान के लिए 20.06.2011 को डीपीआर एनईसी को सौंपा गया ।
  2. 04 एंड पर 232 मीटर तक और 22 एंड पर 225 मीटर तक रनवे और एप्रन का विस्तार- 154.80 करोड़ रु. के सहायता अनुदान के लिए 22.12.2011 को डीपीआर एनईसी को सौंपा गया ।
  3. एबी-321 प्रकार के वायुयान के लिए एप्रन विस्तार ।
  4. नये एटीसी टावर और तकनीकी ब्लॉक का निर्माण– नियोजन के चरण में ।
  5. नये अग्निशमन केंद्र का निर्माण-– नियोजन के चरण में ।
  6. आइसोलेशन बे का निर्माण- नियोजन के चरण में ।
  7. रात्रि लैंडिंग सुविधाओं का संस्थान और आईएलएस ।
21. तुरा (पश्चिमी गारो हिल्स) मेघालय सरकार यद्यपि यह हवाई अड्डा प्रचालनगत है, लेकिन नियमित उड़ान नहीं है ।
  1. यह हवाई अड्डा मेघालय सरकार का है। राज्य सरकार के अनुरोध पर एएआई ने एटीआर-72 वायुयानों के प्रचालन के लिए मौजूदा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए डीपीआर नागर विमानन मंत्रालय और राज्य सरकार को इस अनुरोध के साथ सौंप दिया गया है कि लगभग 56.5 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराई जाए ।  राज्य सरकार की ओर से उत्तर अभी प्राप्त होना है ।
मिजोरम
22. लेंगपुई (आइजॉल)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
मिजोरम सरकार प्रचालनगत --
23. तुरिअल (आइजॉल) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अप्रचालनगत  
नागालैंड
24. दिमापुर (दिमापुर)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण प्रचालनगत  
25. चेथु (कोहिमा) प्रस्तावित ग्रीनफील्ड – विचार-विमर्श के अधीन
सिक्किम
26. पैकयोंग (पूर्वी सिक्किम)
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण निर्माणाधीन और पूर्ण होने की प्रस्तावित तारीख –दिसंबर, 2013
वास्तविक प्रचालन में छह महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है ।
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त्रिपुरा
27. अगरतला (पश्चिमी त्रिपुरा)
(31.12.2011 को डीजीसीए को  सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के रूप में लाइसेंसीकृत किया गया  )
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण प्रचालनगत
  1. नये कंट्रोल टावर के निर्माण की प्रगति – पूर्ण होने के करीब है ।
  2. एबी-321 हैंगर के लिए वायुयान रख-रखाव हैंगरों का निर्माण– डीपीआर तैयार किया जा रहा है । 
  3. राज्य सरकार से विस्तार और हवाई अड्डे के विकास के लिए 303 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है, जिसमें शामिल हैं:
    • ग्लाईड पथ की शिफ्टिंग के लिए 31 एकड़ – रनवे पर उपलब्ध पूर्ण लैंडिंग दूरी के लिए आवश्यक;
    • रनवे पट्टी के लिए 26 एकड़– डीजीसीए लाइसेंस के लिए;
28. खोवाइ (खोवाइ) भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अप्रचालनगत अध्ययन के अनुसार विकसित नहीं किया जा सकता ।
29. कैलाशहार (उत्तरी त्रिपुरा) -वही- -वही- एक ओर बंद और दूसरी ओर राजमार्ग होने के कारण एटीआर-72 के प्रचालन के लिए इसे विकसित नहीं किया जा सकता ।
30. कमालपुर (उत्तरी त्रिपुरा) -वही- -वही- एएआई ने एटीआर-72 के लिए प्रचालन के लिए  इसका व्यवहार्यता अध्ययन किया जिसके लिए 50.5 एकड़ भूमि के प्रावधान की आवश्यकता है जिसके लिए राज्य सरकार से पहले ही अनुरोध किया जा चुका है और राज्य सरकार से उत्तर की अभी प्रतीक्षा है । 

 

Page Maintained By: 
श्री उदय शंकर, निदेशक

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