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ट्रांसमिशन परियोजनाएं

पूर्वोत्तर क्षेत्र में पावरग्रिड की संचरण प्रणाली

 

1.0 पूर्वोत्तर क्षेत्र में पावरग्रिड – वर्तमान में

 

       वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में पावरग्रिड के नेटवर्क में शामिल हैं :

  1. ट्रांसमिशन लाईनें : 4815 Cकिमी.s. (400कि.वा.: 1870, 220कि.वा. : 545, 132/ 66कि.वा. : 1810, अंतरक्षेत्रीय (400कि.वा. ): 430, अंतरक्षेत्रीय (220कि.वा. ): 160)
  2. उप-केंद्र : 14. : 1445 एमवीए

    ट्रांसमिशन प्रणाली और विद्युत आपूर्ति से संबंधित परिदृय का ब्यौरा अनुबंध-1.[PDF](19.83 KB)में दिया गया है ।

2.0 पूर्वोत्तर क्षेत्र में पावरग्रिड – चल रही योजनाएं

 

2.1 निचले सुबनसिरी ज.वि.प. (2000 मे.वा.) और कामेंग ज.वि.प. (600 मे.वा.) और अरुणाचल प्रदेश की परियोजनाओं से जुड़ी ट्रांसमिशन प्रणाली ।

  1. इस परियोजना के तहत पावरग्रिड असम के बिश्वनाथ चरिलाई स्थित पुलिंग उप-केंद्र को जेनेरेटिंग स्कीम के साथ जोड़ने कके लिए 400कि.वा. की समर्पित ट्रांसमिशन प्रणाली का निर्माण कर रहा है ।
  2. पूर्वोत्तर क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र/ पश्चिमी क्षेत्र तक विद्युत वितरण के लिए उत्तर क्षेत्र में पूर्वोत्तर के विश्वनाथ चरिलाई से आगरा तक 6000 मे.वा. एचवीडीसी लाईन (800 कि.वा. )
  3. ट्रांसमिशन प्रणाली का ब्यौरा अनुबंध-2.[PDF](16.57 KB)में दिया गया है ।
  4. अनुमानित लागत : 11,130 करोड़ रु.
  5. स्थिति : कार्यान्वयनाधीन

     

    1. निचले सुबनसिरी और कामेंग विद्युत सृजन में काफी देरी हो चुकी है और अब इनके क्रमशः मार्च, 2015 और जून, 2016 में चालू हो जाने की संभावना है ।
    2. निचले सुबनसिरी के लिए एसी प्रणाली दिसंबर, 2013 तक (सुबनसिरी ज.वि.प. के आरंभ के साथ बराबरी के लिए कार्य को अधिकतम संभव स्तर तक धीमा कर दिया गया है ।)
    3. कामेंग ज.वि.प. के लिए एसी प्रणाली 12वीं योजना के मध्य तक (कामेंग ज.वि.प. के आरंभ के साथ बराबरी के लिए कार्य को अधिकतम संभव स्तर तक धीमा कर दिया गया है ।)
    4. एचवीडीसी प्रणाली सितंबर, 2014 तक

2.2 पलाटाना (726 मे.वा.) और बोगाइगांव (750 मे.वा.) के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली ।

इस स्कीम में निम्नलिखित शामिल हैं :

  1. विद्युत सृजन लिंक्ड स्कीम: (एनईटीसीएल कार्यक्षेत्र)

    इसका निर्माण एनईटीसी द्वारा (ओटीपीसी का जेवी -35%, त्रिपुरा-10%, असम-13%, मिजोरम-10%, मणिपुर-6%, पावरग्रिड-26%)

     

    1. लागत: 1770 करोड़ रु.
    2. ट्रांसमिशन प्रणाली:

       

      1. 400कि.वा. डी/सी पलाटाना – सिलचर लाइन – 254 किमी. 11 स्थलों के लिए 12 अप्रैल तक वन मंजूरी प्राप्त होने के अधीन जून, 2012 तक अनुमानित (त्रिपुरा में 3 और असम में 8)
      2. 400कि.वा. डी/सी सिलचर – बोगाईगांव लाइन – 408 किमी. 122 स्थलों के लिए 12 अप्रैल तक वन मंजूरी प्राप्त होने के अधीन दिसंबर, 2012 तक अनुमानित (असम में 58 और मेघालय में 64)
    3. पावरग्रिड द्वारा ट्रांसमिशन प्रणाली :

       

      1. अनुमोदित परियोजना लागत : 2144 करोड़ रु.
      2. ट्रांसमिशन प्रणाली :

        विस्तृत कार्यक्षेत्र इस प्रकार है:

         

        1. नये 400, 220 और 132 कि.वा. के 8 एस/एस (असम में सिलचर और मरिआनी, अरुणाचल प्रदेश में रोविंग, तेजु और नामसाइ, मणिपुर में इंफाल, मिजोरम में मेलरिएट और नागालैंड में मोकोकचुंग)
        2. नये 400, 220 और 132 कि.वा. ट्रांशमिशन लाइनों के 14

           

          1. पलाटाना - सुरजमणिनगर 400कि.वा. डी/सी लाइन (132कि.वा. पर आवेशित) (त्रिपुरा के लिए)
          2. सिलचर – पुरबा कंचन बारी 400कि.वा. डी/सी लाइन (132कि.वा. पर आवेशित) (त्रिपुरा के लिए)
          3. सिलचर – मेलरिएट (नया) 400कि.वा. डी/सी लाइन (132कि.वा. पर आवेशित) (मिजोरम के लिए)
          4. सिलचर – इंफाल (नया) 400कि.वा. डी/सी लाइन (132कि.वा. पर आवेशित) (मणिपुर के लिए))
          5. मरिआनी (नया) - मोकोकचुंग (पीजी) 220कि.वा. डी/सी लाइन (नागालैंड के लिए)
          6. पासिघाट–रोइंग–तेजु–नमसाइ 132कि.वा. एस/सी लाइन (डी/सी टावर पर) (अरुणाचल प्रदेश)

        अनुबंध- 3.[PDF](15.02 KB)विवरण के रूप में संलग्न है ।

      3. परियोजना क्रियान्वयनाधीन है और निम्नलिखित मद पहले ही चालू होने के लिए तैयार है ।

         

        शेष प्रणाली के मई 2012 के बाद प्रगामी तौर पर चालू करने की आशा है ।

         

        1. सिलचर में नया एस/एस2x200 एमवीए, 400/132कि.वा. –पहले से ही आवेशित
        2. सिलचर –श्रीकोना (असम) 132कि.वा. डी/सी लाइन - पहले से ही आवेशित

3.0 पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिक्किम में ट्रांसमिशन और संवितरण को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक स्कीम

 

3.1 पृष्ठभूमि

 

ट्रांसमिशन, सब-ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए पावरग्रिड और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ मिलकर सीईए द्वारा एक व्यापक स्कीम विकसित की गई है । इसका डीपीआर पावरग्रिड ने तैयार किया है । इस स्कीम को दो चरणों में प्रोग्राम किया गया है; 2013-14 तक प्रगतिशील चरण-1 और 2014-15 तक प्रगतिशील चरण-2 ।

 

3.2 डीपीआर

  1. मुख्य डीपीआर 6 जनवरी, 2010 को प्रस्तुत किया गया था ।
  2. अरुणाचल प्रदेश (वितरण), त्रिपुरा (ट्रांसमिशन/सब-ट्रांसमिशन), सिक्किम (ट्रांसमिशन/सब-ट्रांसमिशन) से संबंधित संशोधित /अनुपूरक डीपीआर 06-07-2010 को प्रस्तुत किया गया ।
  3. अरुणाचल प्रदेश (ट्रांसमिशन/सब-ट्रांसमिशन) से संबंधित संशोधित डीपीआर 19-07-2010 को प्रस्तुत किया ।

डीपीआर में 10 खंड हैं- 8 खंड पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्क्म के लिए ट्रांसमिशन और वितरण स्कीमों (चरण-1 और 2) को कवर करता है, 1 खंड सामान्य ट्रांसमिशन प्रणाली के लिए और 1 खंड सामान्य तकनीकी संबंधी सार्वजनिक विवरण और कुल स्कीमों के ब्रीफ के लिए है ।

 

3.3 कार्य क्षेत्र

 

लाइन

  1. ट्रांसमिशन (132कि.वा. और इससे अधिक) : लगभग 5700 किमी.
  2. वितरण (33कि.वा. और इससे अधिक) : लगभग 8450 किमी.

उप-केंद्र

  1. ट्रांसमिशन (132कि.वा. और इससे अधिक) : 87(लगभग 7400 एमवीए)
  2. वितरण (33कि.वा. और इससे अधिक) : 332 (लगभग 2255 एमवीए)

3.4 अनुमानित लागत

 

मौजूदा स्कीम के लिए अनुमानित लागत का सार (जिसके लिए डीपीआर तैयार किए जा रहे हैं) इस प्रकार हैं:

 

ट्रांसमिशन प्रणाली : 7649.82 करोड़ रु.

 

वितरण प्रणाली : 2372.15 करोड़ रु.

 

उप-कुल : 10021.97 करोड़ रु.

 

परामर्शीय प्रभार @ 12% : 1326.51 करोड़ रु.

 

कुल लागत : 11348.48 करोड़ रु.

 

आईडीसी सहित कुल लागत: 11411.00 करोड़ रु.

 

लागत अनुमान और कार्यक्षेत्र से संबंधित विस्तृत विवरण अनुबंध-4.[PDF](15.65 KB)में संलग्न है ।

 

3.5 निधीयन संबंधी प्रबंध

 

यह समझा जाता है कि विद्युत मंत्रालय और आर्थिक मामले विभाग, वित्त मंत्रालय ने भारत सरकार और विश्व बैंक के माध्यम से निधियों के प्रबंध के लिए मामले को आगे उठाया है । विद्युत मंत्रालय से प्राप्त सूचना के अनुसार विश्व बैंक ने 500 मिलीयन यूएस डॉलर के तीन भागों में 1500 मिलीयन यूएस डॉलर की सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव किया है । तद्नुसार विद्युत मंत्रालय ने डीपीआर में कवर किए गए ट्रांसमिशन और वितरणकारियों को प्राथमिकता में लाने की इच्छा जाहिर की है ताकि प्रस्तावित विश्व बैंक सहायता के प्रथम भाग को मैच किया जा सके ।

 

उपरोक्त के अनुसार पावरग्रिड और संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों के परामर्श से सीईए ने 6 राज्यों अर्थात् असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर के लिए उपरोक्त विश्व बैंक सहायता के पहले हिस्से के लिए पूर्व के डीपीआर पर आधारित कार्यक्षेत्र की प्राथमिकता आरंभ की है ।

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श्री उदय शंकर, निदेशक

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